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Glanders का आक्रमण कोरोना से भी घातक संक्रमण: भारत में 1 खतरनाक बिमारी की दस्तक

Glanders एक संक्रामक और संभावित रूप से घातक बिमारी है जो मुख्य रूप से घोड़ों, गधों और खच्चरों को प्रभावित करती है। हालांकि यह बकरियों, कुत्तों और बिल्लियों जैसे अन्य जानवरों को भी संक्रमित कर सकती है।

यह Glanders बिमारी बैक्टीरिया बर्कहोल्डरिया मैलेई के कारण होती है। ग्लैंडर्स संक्रमित जानवरों, दूषित फ़ीड, पानी या सतहों के संपर्क से फैल सकता है, और कभी-कभी यह मनुष्यों को भी संक्रमित कर सकता है।

Glanders बिमारी की पहली दस्तक

Glanders can catch other animals also

भारत के एक राज्य हरियाणा में इस खतरनाक बीमारी Glanders ने अपनी दस्तक दे दी है जिससे हरियाणा प्रदेश में हड़कंप मच गया है।

हिसार के गांव सुल्तानपुर में एक खच्चर, इस भयानक बिमारी से पॉज़िटिव मिला है। इसे देखते हुए पशुपालन विभाग ने घोड़े की प्रजातियो से जुड़े सभी पशुओं के आने जाने पर तत्काल रोक लगा दी है।

सैंपल लेने के बाद पता चला Glanders का

हिसार निश्चित राष्ट्रीय अशोक अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कुछ दिन पहले इस खच्चर के खून के सैंपल लेकर जांच शुरू की थी। इस खच्चर को क्वारंटीन भी कर दिया था। जांच में पाया गया है कि Glanders नामक खतरनाक बिमारी से यह खच्चर पीड़ित हैं। संभावित खतरे को देखते हुए विज्ञानिक ऐक्टिव हो गए क्योंकि वह जानते हैं इस Glanders का इलाज असंभव है। 

मानव प्रजाति में पाई जाने वाले जितनी भी खतरनाक बीमारियां है जैसे कैंसर, एड्स इत्यादि, यह Glanders नामक बिमारी उनसे भी खतरनाक मानी जाती है।

कोरोना में तो फिर भी बचने की संभावना थी लेकिन इस बिमारी में किसी के बचने की कोई संभावना नहीं है।

इस बिमारी से इंसानों को सतर्क रहने की सख्त जरूरत है क्योंकि इसकी चपेट में आने से वे भी संक्रमित हो सकते हैं भारत में आने वाला सीज़न शादियों का सीज़न है। इसलिए भारत सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने पूरे भारत में खासकर हरियाणा को अलर्ट जारी कर दिया है।

Glanders की बिमारी इतनी खतरनाक क्यों?

वैज्ञानिकों के मुताबिक Glanders घोड़ों की प्रजातियां में एक जानलेवा संक्रामक रोग हैं। इसका पहला लक्षण यह है की घोड़े की

नाक में से खून बहना

सांस लेने में तकलीफ

शरीर का सूख जाना

पूरे शरीर पर फोड़े या गांठें बन जाना होता है।

सूजे हुए लिम्फ नोड्स बट भी इस Glanders का बहुत बड़ा संकेत हो सकते हैं।

किसी एक पशु के संक्रमित होने से ये बिमारी एक पशु से दूसरे पशु में बड़ी आसानी से पहुँच सकती है।

यह बिमारी Bacterium Burkholderia mallei नामक बैक्टीरिया से फैलती है।

जो भी पशु इस Glanders से पीड़ित हो जाता है उस पशु या घोड़े को वैज्ञानिक तरीके से मारना ही पड़ता है। इसको एक तरह की इच्छामृत्यु ही कहते हैं।

घोड़ों से आसानी से संक्रमित हो सकते हैं  

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वैज्ञानिक परीक्षणों से पता चला है कि यह बिमारी घोड़ों से मनुष्यों में बड़ी आसानी से फैल सकती है। जो लोग घर में घोड़े पालते हैं या घोड़ों की देखभाल करते हैं या फिर उनका उपचार करते हैं, उनको त्वचा, नाक, मुँह और सांस लेने से संक्रमण हो सकता है।

जब यह Glanders नामक बिमारी घोड़ों से मनुष्यों में प्रवेश कर जाती है तो इस बिमारी में मनुष्यों की

मांसपेशियों में दर्द,

छाती में दर्द,

मांसपेशियों में अकड़न,

सिरदर्द और नाक से पानी बहने लग जाता है।

पशुपालन विभाग ने सावधानियाँ को लेकर क्या कहा?

वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार इस Glanders से बचने का एक ही हल है जिससे यह मनुष्य में ना फैले:

अश्व जाति के पशुओं की दौड़,

मेले प्रदर्शनी, बिक्री पर एवं

खेल आदि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए ताकि यह ज्यादा न फैले।

हरियाणा प्रदेश की सरकार ने ऐतिहातन इस बिमारी से लड़ने के प्रबंध कर लिए हैं। 

पूरे प्रदेश में घोड़ों की जांच शुरू कर दी गई है। इसको लेकर हाई अलर्ट भी जारी कर दिया गया है।  

केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देश

Glanders की बढ़ती संभावना को देखते हुए भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग DHHD  मत्स्य मंत्रालय की तरफ से Glanders बिमारी के सन्दर्भ में गाइडलाइंस जारी की गई है।

हिसार जिले के अश्व प्रजाति के पशुओं में Glanders बिमारी से बचाव नियंत्रण के लिए नियंत्रित क्षेत्र घोषित किया गया है। इसके साथ ही घोड़े, गधे, खच्चर असर प्रजाति के पशुओं की जिले में से अन्य स्थानों पर आवाजाही को पूर्ण प्रतिबंधित कर दिया गया है।

25 किलोमीटर के दायरे में बफरजोन

हिसार में ग्लैंडर्स का जैसे ही दूसरा पॉज़िटिव केस मिला है तो सरकार एक्टिव हो गई है। हिसार जिले को 25 किलोमीटर के एरिया तक बफर ज़ोन में तब्दील कर दिया गया है। इस ज़ोन में आने वाले, रहने वाले हर अश्व वंशीय पशु के सैंपल लिए जाएंगे। छह महीने पहले रोहतक में एक घोड़े में Glanders का केस मिल चुका है।

उपरोक्त Condition में क्या करें क्या न करें

क्योंकि यह बिमारी लाइलाज है इसका कोई अभी तक इलाज संभव नहीं हो पाया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि लोगों को ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है, सिर्फ एहतियात बरतने की जरूरत है।

क्योंकि शादियों का सीज़न है। आवाजाही भी ज्यादा हो रही है। कई शादियों में तो दूल्हे के लिए घोड़े और घोड़ियों की डिमांड बनी रहती है। खच्चरों से लोग गुड रोज़मर्रा का सामान ढोने का कार्य लेते हैं। वैज्ञानिकों ने लोगों को घोड़े, खच्चरों से दूर रहने की सलाह दी है।

संभावित खतरा क्यों है

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क्योंकि है शादियों का सीज़न है। पूरे हरियाणा में देवउठनी ग्यारस पर विवाह समारोह का आयोजन किया जाता है। शादियों में घोड़ा घोड़ी पर बारात निकालना फैशन के साथ साथ आम बात है। हमें देखना होगा कि दुल्हा जिंस घोड़ी पर सवार हो रहा है क्या वह Glanders से ग्रसित तो नहीं। इसके लिए सावधानी बरती जानी बहुत जरूरी है। घोड़े की घुड़सवारी करने वाले अवश्य सतर्क रहें।

पुरे हिसार और उसके आस पास के क्षेत्र में जैसे ही इस बिमारी के सैंपल मिले, सरकार ने सैंपलिंग का क्षेत्र बढ़ा दिया है। पूरे प्रदेश में सैंपलिंग की जा रही है।

GLANDERS नामक इस बिमारी का बग्घी मालिको के लिए परेशानी का सबब बन गया है। क्योंकि उनकी कमाई का यही सीज़न शुरू होता है और इस तरह के हालत में उनका यह सीज़न इस बार आर्थिक मंदी में जाने वाला है।

खबर का उद्देश्य आपको सिर्फ और सिर्फ Glanders से सचेत करना है।

Frequently Asked Questions

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